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हमारी मासिक पत्रिका दिव्यांतर (ई पत्रिका) में पढिये श्री अरविन्द के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘सावित्री’ का हिन्दी गद्य में अनुवाद
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श्रीअरविन्द ग्राम का संकल्प पत्र

 

श्रीअरविन्द ग्राम भारतीय संस्कृति के आधारभूत सिद्धान्तों मे जन्मे, श्रीमाँ के दुलार में बढ़े,श्रीअरविन्द के चिरंतन संदेष में फले-फूले और अपनी चेतना को भारत के सभी गाँवों में मुक्त हाथ से बाँटे, इस सद्भावना व सदिच्छा के साथ हम इस महायज्ञ की प्रज्ज्वलित अग्नि में अपनी आहुति डालते हैं और-

मानवता के विकास में नई कड़ी जोड़ने के उद्देष्य को लेकर मन्दिर के कलष में हम अपनी आस्था की माटी का अक्षत छोड़ते हैं तथा-

हम जाति, सम्प्रदाय, मजहब, वादों व मान्यताओं के मैले वसनों को उतारकर नंगे बदन जगदम्बा की गोद में आश्रय पाने की अभीप्सा का गंगा जल लेकर अपनी भावनाओं के कुषों से इस षाष्वत गोद की वेदी बार-बार सींचते हैं, जिससे-

हम अपनी अन्धता के घट के ऊपर प्रज्ज्वलित अतिमानस के सूर्य की स्वर्णिम किरणों से नहा सकें।

           माँ मन्दिर का

शिलान्यास दिवस - 29 मार्च 1972

उद्घाटन दीपावली दि. 3 नवम्बर 1975